Wednesday, January 27, 2010

मेरा सवाल 55

हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध रचनाकार श्री जैनेन्द्र कुमार जिनकी एक प्रसिद्घ
कृति त्यागपत्र है ,का असली नाम क्या था ?



मेरा सवाल 54 का सही उत्तर – एक बार ।
सुश्री क्रितिका जी ( spring melodies) द्वारा सर्वप्रथम सही उत्तर प्रेषित किया गया ।
साथ ही उन्‍होंने विस्‍तार से बताया भी ।



इसके अलावा सर्वश्री मनोज जी , मोहसिन जी , रामकृष्‍ण गौतम जी, शमीम जी ,
सगीर जी ने भी सही उत्‍तर प्रेषित किया । आप सभी को तथा समस्‍त आगन्‍तुकों
को धन्‍यवाद एवं आभार।




चलते-चलते 111111111 X 111111111=12345678987654321 होता है ।





18 comments:

मनोज कुमार said...

आनंदीलाल

हास्यफुहार said...

लाल आनंदी।

रामकृष्ण गौतम said...

जैनेंद्र कुमार का जन्म २ जनवरी, सन १९०५, में अलीगढ़ के कौड़ियागंज गांव में हुआ। उनके बचपन का नाम आनंदीलाल था। (आनंदीलाल ही आपके प्रश्न का उत्तर है ज़मीर जी)इनकी मुख्य देन उपन्यास तथा कहानी है। एक साहित्य विचारक के रूप में भी इनका स्थान मान्य है। इनके जन्म के दो वर्ष पश्चात इनके पिता की मृत्यु हो गई। इनकी माता एवं मामा ने ही इनका पालन-पोषण किया। इनके मामा ने हस्तिनापुर में एक गुरुकुल की स्थापना की थी।

इनके अन्य उपन्यास हैं :
'परख' (१९२९), 'सुनीता' (१९३५), 'त्यागपत्र' (१९३७), 'कल्याणी' (१९३९), 'विवर्त' (१९५३), 'सुखदा' (१९५३), 'व्यतीत' (१९५३) तथा 'जयवर्धन' (१९५६)।



शुभ भाव


राम कृष्ण गौतम

शमीम said...

अमृत लाल

शमीम said...

शायद आनंद लाल ।

बूझो तो जानें said...

Shamim ji aur Hasya fuhar ji , aaplog ek baar aur sochkar uttar de sakte hai.....Dhanyawad

मोहसिन said...

zameer bhai aaj aapne mazedaar sawal poocha hai. good morning.

मोहसिन said...

jainendra kumar ji ka asli naam AANANDI LAAL hai.

Springmelodies said...

Sorry..no idea :(

शमीम said...

धनपत राय हो सकता है.

शमीम said...

सबने जब लाल सरनेम दिया है तो सोचना परेगा.

शमीम said...

याद आया उनका नाम तो "आनंदी लाल" था.

Springmelodies said...

आनंदीलाल

thanks to wikipedia :)

रामकृष्ण गौतम said...

ज़मीर जी, मेरा उत्तर मिला या नहीं..? ज़रा आस्वस्त कर दीजिए... मुझे शंका हो रही है!...


शुभ भाव

राम कृष्ण गौतम

रामकृष्ण गौतम said...

अगर मेरा उत्तर प्राप्त न हुआ हो तो एक बार फिर दिए देता हूँ!

"त्यागपत्र" उपन्यास के लेखक जैनेन्द्र जी का दूसरा नाम "आनंदीलाल" था, ये उनके बचपन का नाम था! जैनेंद्र कुमार का जन्म २ जनवरी, सन १९०५, में अलीगढ़ के कौड़ियागंज गांव में हुआ। इनकी माता एवं मामा ने ही इनका पालन-पोषण किया। इनके मामा ने हस्तिनापुर में एक गुरुकुल की स्थापना की थी। उन्हें घर पर "आनंदीलाल" ही बुलाया जाता था...


उनकी अन्य कृतियाँ इस प्रकार हैं :

उपन्यासः 'परख' (१९२९), 'सुनीता' (१९३५), 'त्यागपत्र' (१९३७), 'कल्याणी' (१९३९), 'विवर्त' (१९५३), 'सुखदा' (१९५३), 'व्यतीत' (१९५३) तथा 'जयवर्धन' (१९५६)।

कहानी संग्रहः 'फाँसी' (१९२९), 'वातायन' (१९३०), 'नीलम देश की राजकन्या' (१९३३), 'एक रात' (१९३४), 'दो चिड़ियाँ' (१९३५), 'पाजेब' (१९४२), 'जयसंधि' (१९४९) तथा 'जैनेंद्र की कहानियाँ' (सात भाग)।

निबंध संग्रहः 'प्रस्तुत प्रश्न' (१९३६), 'जड़ की बात' (१९४५), 'पूर्वोदय' (१९५१), 'साहित्य का श्रेय और प्रेय' (१९५३), 'मंथन' (१९५३), 'सोच विचार' (१९५३), 'काम, प्रेम और परिवार' (१९५३), तथा 'ये और वे' (१९५४)।

अनूदित ग्रंथः 'मंदालिनी' (नाटक-१९३५), 'प्रेम में भगवान' (कहानी संग्रह-१९३७), तथा 'पाप और प्रकाश' (नाटक-१९५३)।

सह लेखनः 'तपोभूमि' (उपन्यास, ऋषभचरण जैन के साथ-१९३२)।

संपादित ग्रंथः 'साहित्य चयन' (निबंध संग्रह-१९५१) तथा 'विचारवल्लरी' (निबंध संग्रह-१९५२)। (सहायक ग्रंथ- जैनेंद्र- साहित्य और समीक्षाः रामरतन भटनागर।)



शुभ भाव


राम कृष्ण गौतम

बूझो तो जानें said...

Gautam ji aap chinta na karein aapka uttar maine sahej kar rakha hai . Thoda intejaar karein mai use thodi der baad prakashit karunga.

ZAMEER

बूझो तो जानें said...

Mujhe harsh hai ki aap log ruchi lete hai aur uttar bhejte hai . Yeh mere liye protsahan hai .

AAbhar , Dhanyawad.
Gudnit.

सतीश चन्द मद्धेशिया said...

आनन्दी लाल