Sunday, May 16, 2010

चांद सा बनना चाहिये...





एक विचार

चन्द्रमा अपना प्रकाश सारे जग में फैलाता है परन्तु अपना कलंक अपने अन्दर ही रखता है.उसी प्रकार सद व्यक्ति अपनी अच्छाइयों से दुसरों की मदद करता है तथा अपने अवगुणों को अपने अन्दर छिपाये रखता है.

(चित्र साभार गूगल- मोहसिन)

5 comments:

अल्पना वर्मा said...

बहुत ही सुन्दर विचार हैं .
मोहसिन आप का चित्र चयन भी बहुत अच्छा लगा.

मोहसिन said...

आदर्णीय अल्पना दीदी, बहुत बहुत धन्यवाद.

शमीम said...

sundar vichar.

Akshita (Pakhi) said...

बहुत सुन्दर विचार...
_____________
'पाखी की दुनिया' में आपका स्वागत है.

Sonal said...

aapke dwara likhi gayi ye 4 lines bahut kuch kehti hai... bahut ache...
Meri Nai Kavita padne ke liye jaroor aaye..
aapke comments ke intzaar mein...

A Silent Silence : Khaamosh si ik Pyaas